Mohd. Tughlak was neither so stupid and nor so cruel.
Sharing Jasbir Chawla
मोहम्मद तुग़लक़ का पूरा नाम
'फक्र-उद-दीन मोहम्मद-बिन-तुग़लक़' को (1325-1351.AD)
🌑 मुद्रा का विमुद्रिकरण-तब नोट नहीं होते थे
🌑 उसने सिक्के ढलवाये लेकिन सिक्कों की धातु का मूल्य बहुत कम था और मुद्रा की फेसवेल्यु बहुत अधिक होनें से जालसाज़ी करनें वालों ने नक़ली सिक्कों की भरमार कर दी
🌑 चार साल के बाद उसनें वह मुद्रा बंद कर दी.
उसे उसकी सोच के कारण अपने समय से पहले पैदा हुआ माना जाता है
🌑 मोहम्मद तुग़लक़ तर्क,दर्शन खगोल शास्त्र,गणित,ज्योतिष,चिकित्सा विज्ञान में दक्ष था
🌑 वह अरबी,फ़ारसी,तुर्की और संस्कृत भाषाओं का ज्ञाता था
🌑 उसनें उत्तर और दक्षिण दोनों पर बेहतर शासन करनें के लिये राजधानी दिल्ली से दौलताबाद करनें का निर्णय किया
🌑 उसनें प्रजा को दौलताबाद शिफ़्टिंग के लिये अनुदान दिये
🌑 रास्ते मे हर तीन किलोमीटर पर आराम के लिये विश्रामस्थल बनाये
🌑 जहाँ भोजन पानी की व्यवस्था की
🌑 खानाकाह बनाये और सूफी संतों की वहाँ तैनाती की
🌑 दिल्ली दौलताबाद के बीच तीव्र गति की डाक सेवा शुरू की
🌑 उसका यह प्लान परिस्थितियों के कारण फ़ेल हो गया.
No comments:
Post a Comment