Tuesday, 29 November 2016

Mohd. Tughlak was neither  so stupid and nor so cruel.

Mohd. Tughlak was neither  so stupid and nor so cruel.
Sharing Jasbir Chawla
मोहम्मद तुग़लक़ का पूरा नाम
'फक्र-उद-दीन मोहम्मद-बिन-तुग़लक़' को (1325-1351.AD)

🌑 मुद्रा का विमुद्रिकरण-तब नोट नहीं होते थे
🌑 उसने सिक्के ढलवाये लेकिन सिक्कों की धातु का मूल्य बहुत कम था और मुद्रा की फेसवेल्यु बहुत अधिक होनें से जालसाज़ी करनें वालों ने नक़ली सिक्कों की भरमार कर दी
🌑 चार साल के बाद उसनें वह मुद्रा बंद कर दी.
उसे उसकी सोच के कारण अपने समय से पहले पैदा हुआ माना जाता है
🌑 मोहम्मद तुग़लक़ तर्क,दर्शन खगोल शास्त्र,गणित,ज्योतिष,चिकित्सा विज्ञान में दक्ष था
🌑 वह अरबी,फ़ारसी,तुर्की और संस्कृत भाषाओं का ज्ञाता था
🌑 उसनें उत्तर और दक्षिण दोनों पर बेहतर शासन करनें के लिये राजधानी दिल्ली से दौलताबाद करनें का निर्णय किया
🌑 उसनें प्रजा को दौलताबाद शिफ़्टिंग के लिये अनुदान दिये
🌑 रास्ते मे हर तीन किलोमीटर पर आराम के लिये विश्रामस्थल बनाये
🌑 जहाँ भोजन पानी की व्यवस्था की
🌑 खानाकाह बनाये और सूफी संतों की वहाँ तैनाती की
🌑 दिल्ली दौलताबाद के बीच तीव्र गति की डाक सेवा शुरू की
🌑 उसका यह प्लान परिस्थितियों के कारण फ़ेल हो गया.

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