Friday, 18 November 2016

नबी स० के नाम नज़्म:-बिजेंद्र सिंह परवाज़

उनकी नुबुवत के परचम को, यूँ लहराए जंगल में
इक साहिब जो सूखा चमड़ा, भून के खाए जंगल में

उम्मत का गर दर्द समेंटें, ऐसे मुहम्मद बैठें हैं
जैसे एक परिंदा अपनी, नस्ल छुपाए जंगल में

उनकी हिम्मत का क्या कहना, कैसी फरमाबरदारी
आपकी ख़ातिर जिन लोगों ने, पत्ते खाए जंगल में

मर गए बू तालिब, उनसे ऐसा सहारा छीन लिया
जिसके ख़ौफ़ से दुश्मन अपना, जिस्म छुपाए जंगल में

मेरे खुदा ऐसी बच्ची को, जन्नत का हर सुख देना
जो तेरे महबूब की ख़ातिर, रोटी लाए जंगल में

इस दुनिया का कोना कोना, ईमाँ से आबाद करे
ऐ "परवाज़!" रसूल-ए-अरबी, यूँ भी आए जंगल में...।

(सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम)

#बिजेन्द्र_सिंह_परवाज़

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