Monday, 7 November 2016

मोदी जी, 'नजीब की माँ भी तो आपकी बहन है, उसकी फ़रियाद सुनिये' पढ़िए पीएम को लिखा यह पत्र

आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी,

आप धरती के उस क्षेत्र के कर्ता धर्ता हैं जहां मां की पूजा और वंदना की जाती है,जहां दूध का क़र्ज़ दुनिया के सारे बंधनों से बढ़ कर समझा जाता है, जी मैं भारत वर्ष की बात कर रहा हूं  ! 

जहां धरती को भी माता का दर्जा दिया जाता है, लेकिन उसी भारत की राजधानी दिल्ली में आपके शीशमहल से थोड़ी ही दूरी पर पिछले  25 दिनों से एक मां अपने बच्चे के ग़ायब होने पर  दर बदर भटक रही है,नजीब नामी वो बच्चा  जिसका का संबंध यूपी के एक जिले बदायूं से है- वह एक गरीब परिवार से संबंध रखता है- उसने जामिया मिल्लिया इस्लामिया, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी , जामिया हमदर्द और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा पास किया लेकिन जेएनयू में नाम आने के बाद वह यहीं से "एमएससी बायो टेक्नालोजी" करने का फैसला कर लिया-  जेएनयू के हॉस्टल 'माही मांडव  में रहता था-  वह कभी किसी अपराध में शामिल नहीं रहा,  एम.एस.सी बायो टेक्नोलोजी कोई मामूली कोर्स नहीं है बल्कि वहां तक ​​पहुंचने के लिए असाधारण मेहनत करनी पड़ती है जो नजीब ने की-  J.N.U मेॆ बायोटेक्नालोजी की सिर्फ़ 20 सीटें हैं,नजीब किसी के कोटे से या सिफारिश से नहीं  अपनी मेहनत और लगन से यहां तक पहुंचा था,
उसने इतने महत्वपूर्ण पाठ्यक्रम के पूरा होने के लिए जामिया मिलिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को ख़ैर बाद कहकर जेएनयू में दाखिला लिया तो उसके सामने कोई महत्वपूर्ण लक्ष्य अवश्य रहा होगा वह भविष्य में देश तथा राष्ट्र के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो सकता था, शायद आपकी पार्टी बी.जे.पी की सपोर्टर विंग  हिंदुत्व वादी संगठन ABVP के गुंडों कोनजीब का कामयाब भविष्य  चुभने लगा था, तभी तो उसे वहशियों की तरह मार कर ग़ायब कर दिया गया, नजीब अहमद का मामला मामूली नहीं है, एक विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय से एक छात्र का 25   दिनों से गायब रहना बहूत सारे सवाल उठाता है, विद्यालय प्रशासन को पता भी है कि उसके साथ मारपीट करने वाले कौन लोग हैं ?

लेकिन प्रशासन पुलिस और आपकी सरकार इन गुंडों के सामने बेबस है- 
उस पर यही कहा जा सकता है कि प्रशासन और सरकार में कानून और न्याय नाम की कोई बात नहीं है, नजीब अहमद के मामले में आपकी सरकार मूकदर्शक बनी हुई है और यहां की खुफिया एजेंसियां ​​जो कुछ ही मिनटों में एक विस्फोट के बाद आतंकवादियों का पता लगा लेती है और जेएनयू के भाषण में विदेशी व्यक्ति की सोच का भी पता लगा लेती हैं वह भी असहाय हैं- दिल्ली पुलिस की हालत यह है  जब से ये उच्च शिक्षा प्राप्त छात्र ग़ायब हुआ है  तभी से आपकी ये तेज़तर्रार दिल्ली पुलिस बुलेट प्रूफ़ जैकेट पहन कर नजीब के लिये आवाज़ उठाने वाले लड़कों व लड़कियों पर लाठीचार्ज करके अपनी बहादुरी का लोहा मनवाना चाहती है, और आज तो दिल्ली नहीं पूरे देश के लिए काला दिन साबित हुआ जब आपकी इस क़ाबिल पुलिस ने  उस बेसहारा बेआसरा मां को इंडिया गेट से घसीट 
कर पूरी दिल्ली में पागलों की तरह घुमाया, अब आप ही बताएं कि  इसे पुलिसिया आतंक कहें ?
या लोकतंत्र की मर्यादाओं का उंलन्घन? लेकिन याद रखें,इस मां की आह और आपके  ईशवर, के बीच कोई पर्दा नहीं है,इसे बहूत जल्द इंसाफ़ मिलेगा, अब तो नजीब की मां भी ना उम्मीद हो चुकी है, उसके आंसू खत्म हो चुके हैं, बात बात पर ट्वीट करने वाले,मुसलमानों के एक  हाथ में लैपटाप,दूसरे में कुरान देखने की ख्वाहिश रखने वाले  प्रधानमंत्री जी ! आज आपका ये पूरा सिस्टम अपाहिज क्यों हो चुका है !
मोदी जी,
महोबा की रैली में आपने कहा था कि हम मुस्लिम बहनों को उनका हक़ दिलायेंगे नजीब की मां फातिमा बेगम भी तो आपकी  मुस्लिम बहन है, अगर ज़ुबान के पक्के हैं, तो अपनी इस बहन की  आह व फरियाद को सुनिए, और अगर आप और आपका सिस्टम इतने ही लुंज हो चुके हैं तो कम से कम इस मां को अपने बच्चे के लिये आंसू  बहाने की इजाज़त तो दे ही दीजिये, लोकतंत्र को हिटलरशाही में ना बदलिए, इस लिये कि अब तो नजीब मिले या ना मिले, पर अगर नजीब की मां की आहें,लग गयीं, तो याद रखिये  किसी गरीब की हाय लगे तो राजा भी रंक हो जाता है, और किसी माँ की बेबस हाय से तो ऊपर वाला भी थर्राता है । उस माँ की सुनिये, उसकी हाय मत लीजिए,  क्योंकि ...

है एक माँ के अश्को का सैलाब साहब
कही आपकी सल्तनत बह ना जाये।।
शुक्रिया !!!!

नजीब की मां का एक दूसरा हिंदुस्तानी बेटा
मेहदी हसन एैनी क़ासमी
mehdihasanqasmi44@gmail.com

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