दोस्तों मध्य प्रदेश में 8 लोगों को मार दिया है उसके ऊपर आजकल बहस fb पर चल रही है अगर वो लोग वास्तव में आतंक वादी थे तो किसी को भी उनके मारे जाने पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए मगर दुःख की बात ये है fb पर कुछ ऐसे क़ाबिल दोस्त हैं जो समुदाय विशेष को चिढ़ाने के लिए अत्यधिक अपमान जनक पोस्ट डाल रहे हैं जैसे की उनको72 हूरों के पास भेज दिया ऐसे कमेंट्स से ऐसा लगता है उनको आतंकवादियों के मारे जाने का कोई दुःख नहीं है उनको एक समुदाय विशेष के लोगों के मारे जाने की ख़ुशी है मैं ऐसे दोस्तों से कहना चाहूंगा आतंकवादी को आतंकवादी रहने दो उसको हिन्दू या मुसलमान मत बनाओ ये मुल्क अपनी गंगा जमुनी संस्कृति के कारण जाना पहचाना जाता है ये गंगा जमुनी संस्कृति खतरे में आ गई तो देश की पहचान खतरे में आजाएगी
दोस्तों आज़ादी की जंग हम सबने मिलकर के लड़ी थी जिसमे भगत सिंह के साथ अशफ़ाक़ उल्ला खान ने भी क़ुरबानी दी थी अब्दुल खान गफ्फार गांधी ने मुल्क के बटवारे को मान्यता नहीं दी वो एक ऐसा शख्स था जब मेरां तो बतोर हिंदुस्तानी मरा जबकि उसकी जन्म भूमि अखंड भारत में जो पेशावर है वो थी वो पाकिस्तान में ही रहा परंतु पाकिस्तान को उसने कभी मान्यता नहीं दी और वो अपने आपको भारतीय के रूप में मान्यता दी
हमारे कुछ दोस्त आतंकवाद के नाम पर मुसलमानो को कठघरे में खड़ा करते हैं वो सही नहीं है जब कसाब को फांसी दी गई थी तो हमारे देश के मुसलमानो ने कसाब को अपने क़ब्रगाह में दफन नहीं होने दिया था उन्होंने कहा था कसाब एक दहसत गर्द था इसलिए एक दहसत गर्द को हम अपने क़ब्रगाह में दफन के लिए कोई जगह नहीं देंगे
आतंक की दो परिभाषा नहीं होनी चाहिए अभी jnu में एक छात्र नजीब गायब है उसको abvp के छात्रों ने मारा पीटा और वो तभी से गायब है क्या ये आतंक नहीं है आतंक कैसा भी हो वो देश और समाज के लिए घातक है
सभी मित्रों से निवेदन है आतंक का विरोध हो परंतु किसी भी अपराधी चाहे हिन्दू हो या मुसलमान हो उसको उसकी जाती या मज़हब से मत जोड़ो हम सब हिन्दू मुस्लिम सिक्ख ईसाई मिलकर आतंकवाद से लड़ें|
शिव राज़ यादव
वरिष्ठ कवि,विचारक
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