Sunday, 20 November 2016

डिंगरहेड़ी-शायरी जुल्म के खिलाफ

एक शायर के शब्दों में,अल्फ़ाज़ों में,हुक़ूमत को चेतावनी

और जो लोग रोटी शेक गये #डिंगरहेड़ी जुल्म से,
उनसे मेरा सवाल है,तुम किस मुंह से अपने आप को उन मजलूमो का भाई कहते हो???

और जो लोग नोजवानो को डरा रहे थे fir के नाम पे,मेरा उन लोग से सवाल है,तुम किस मुंह से अपने आप को कौम का हमदर्द कहते हो???

उठ खड़े हो जाओ,के फूंक दो रण्डभेरी,
के युद्ध का समय है युवाओं,आ जाओ
दुष्कर्मी हत्यारों से पवित्र भूमि करनी है
तुम क्रांति की अग्नि,संसार में जलाओ
के आग वो हो जो धधकती रहे सीने में
आओ नदीम के संग,प्रलय बन जाओ।।
तुम चुप हो जाओ,परन्तु चूड़ी भी पहनो
अन्यथा सिंह गर्जना लेकर बढ़ो युवाओं।।

नोजवान ऐ मेवात,आवाम ऐ हिन्द

1.
आओ के करे ऐलान ऐ जंग,जुल्म के मुकाबिल
ताकि फिर कभी कोई पैदा न हो सदियों कातिल।।

2.
दबा हुआ शुरू अध्याय हम करेंगे
उठो के खत्म अन्याय हम करेंगे।।
प्रज्वलित है ज्वाला सीने में हमारे
न्याय न मिला तो न्याय हम करेंगे।।

3.
हवाओ को गले नही लगाना है
मुझे गैर अपना नही बनानां है
मैं होंसला हु कौम का नदीम
मुझे सोये शेर को जगाना है।।

4.
रण्डभेरी भी बज उठे,वाणी में ललकार है
धरती माँ कराह बोली,क्या युवा तैयार है

5.
जो हुए रिहा कातिल तो सहा नही जायेगा
बिना लिए न्याय तो अब रहा नही जायेगा
ऐ न्यायपालिका जो टूट गया विश्वास अगर
हम खुद न्याय करेंगे,फिर कहा नही जायेगा।।

6.
शब्द मेरे है,परन्तु ये जनता की ये वाणी है
अब न हम किसी की सुनेंगे,बात ये ठाणी है
न्याय न मिल सका तो हम खुद न्याय करेंगे
कोशिकाओ में गर उबलता रक्त नही तो पाणी है।।

7.
कराह उठा वातावरण,जब सुनी उसने चीत्कार रे
जब हत्याएं हुयी,और हुए सामूहिक बलात्कार रे
जब न्याय के सैनिक मख़ौल उड़ा रहे अत्यधिक
जब तीनो लोक हिले,और मची चीख पुकार रे।।
वो समय तो ह्रदय विदारक था परंतु मेवातियों
दुःख और हुआ तुमने छोड़ा करना मेरा विचार रे।।

8.
समय आ गया,जोर से पुकारो
अब जागते हुए ही रात गुजारो।।

9.
होंठ सिल गये है या भूल गए है हादसे को
मेरी दास्तान से कोई हमदर्दी नही रखता।।

10.
ये जोश न खत्म हुआ न होने देंगे,
अब और न मजलूम को रोने देंगे
अब इंतकाम खून के बदले खून है
हम ले या कानून बस यही होने देंगे।।

11.
चन्द रूपयो से जख्मक्या ख़ाक भरेंगे,
दर्द तब कम होगा जब इंसाफ करेंगे
उम्मीद हुक़ूमत से जर्रा भर भी नही है
होगी उन्हें फांसी जब हम आवाज़ करेंगे।।

नदीम खान मामलीका,मेवाती

1 comment:

  1. बहुत बढ़िया, हमारी भाषा में
    फट्टे चकते

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