Monday, 21 November 2016

खुद ने यतीमी देखी, गरीबी देखी... मगर जिंदगी भर यतीमों का सहारा भी बने रहे, जब दौलत मिली तो गरीबों पर लुटा दी।

मैं मायूसी की बातें नहीं करता लेकिन हकीकत को समझना और समझाना बहुत जरूरी है.

- राजीव शर्मा -
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- जब मैं हजरत मुहम्मद (सल्ल.) को पढ़ता हूं तो मेरे दिलो-दिमाग को ताकत मिलती है। कितने महान थे मुहम्मद (सल्ल.)! पूरी जिंदगी गम के घाव सहते हुए बिता दी मगर जमाने को मुस्कान ही लौटाते गए।

- खुद ने यतीमी देखी, गरीबी देखी... मगर जिंदगी भर यतीमों का सहारा भी बने रहे, जब दौलत मिली तो गरीबों पर लुटा दी।

- जब दुश्मन जंग में हारा तो जान बख्श दी और दोस्ती का रिश्ता बनाया। उन लोगों से जो कभी खून के प्यासे थे। अपने हिस्से की रोटी उन्हें दे दी जो बगल में खंजर छुपाए बैठे थे।

- जब जीता मक्का तो माफ कर दिया उस दुश्मन को जो तलवार और जुबान से घाव ही देना जानता था और देता आया था।

- मैं हैरान हूं, इस धरती पर कोई शख्स इतना दयावान, इतने बड़े दिलवाला, इतना ज्यादा सकारात्मक सोचने वाला था! हां, यह सच है।

- मगर माफ कीजिए, हां माफ कीजिए... जब मैं उन्हें देखता हूं, उनसे रूबरू होता हूं जो हजरत मुहम्मद (सल्ल.) को नबी मानते हैं, तो उनकी जिंदगी में वे बातें बहुत कम ही दिखाई देती हैं जिनके लिए नबी ने पूरी जिंदगी लगा दी।

- रब के रसूल (सल्ल.) को पढ़ता हूं तो मालूम होता है कि सकारात्मकता क्या होती है, हौसला क्या होता है, हिम्मत क्या होती है, किसी की इज्जत क्या होती है, उम्मीद क्या होती है, नेक बातें क्या होती हैं, वक्त की पाबंदी क्या होती है।

मगर माफ कीजिए, आज हजारों मुसलमानों को पढ़कर (खासतौर से फेसबुक पर) जाना कि मायूसी क्या होती है, नाउम्मीदी क्या होती है, दिशाहीनता क्या होती है, गालियां क्या होती हैं, बेइज्जती क्या होती है, वक्त की बर्बादी क्या होती है।

- ऐ नबी (सल्ल.) आपको पढ़ता हूं तो आंखों में उजाला आ जाता है, मगर मेरे इन भाइयों को पढ़ता हूं तो दूर-दूर तक सिर्फ अंधेरा ही अंधेरा दिखाई देता है। न उम्मीद की रोशनी, न तब्दीली की बातें, न तरक्की की राह, न सब्र का सबक, न छोटे-बड़े की इज्जत, न शांति की नसीहत। बस सियासत का शोर सुनाई देता है। जो नेता कह देते हैं, वही इनके मुंह से निकलता है।

आज तो तकरार और टकराव दिखाई देता है। खुद में खूबियां भी होंगी तो किसी को बताते नहीं, क्योंकि दूसरों की कमियां निकालने से ही फुर्सत नहीं।

- इस खामोश रात में, रब से मेरा सवाल है - क्या प्यारे नबी (सल्ल.) को मानने वाली उम्मत अब्दुल कलाम और अब्दुल सत्तार ईधी पैदा करना भूल गई है? बेहतर हो कि रब से पहले इसका जवाब उन लोगों से ही मिल जाए जिन्हें मेरे सवाल समझ में आते हैं।

- राजीव शर्मा -
https://www.facebook.com/writerrajeevsharma/
(इस पोस्ट के जरिए मैं यह कहना चाहता हूं कि नेताओं का मुंह ताकना छोड़ो, चाहे वह किसी भी पार्टी से हो। अपनी अच्छाई जमाने को दिखाओ। फेसबुक और सोशल मीडिया में सकारात्मक बातें लिखो। बेमतलब की बातों में वक्त बर्बाद न करो।

जब तक आप अच्छाइयों को अपनाने, बताने और दिखाने पर जोर नहीं देंगे, दुनिया आपको अच्छा नहीं बताएगी। चाहे आप लाख अच्छे हों। और ध्यान रखें, अपनी अच्छाई बताने के लिए बिल्कुल जरूरी नहीं कि आप दूसरों की बुराई बताएं।)

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