Tuesday, 1 November 2016

हम भारत के मूल निवासी है:वरिष्ठ वकील रमजान चौधरी

आज कोई ताकत ये चाहती है कि भारत देश के मुसलमानों का मौजूदा व्यवस्था से विश्वास उठ जाए और वो अपने अधिकारों के लिये हिंसक रास्ता अपनाए और देश में एक बड़ा फसाद उभरे, जिससे राजनितिक तोर पर किसी एक पार्टी को फायदा हो।
लेकिन में देश के मुसलमानों और तथाकथित हिन्दू भाइयो से एक निवेदन करना चाहता हूँ कि लड़िये, मरिये, मारिये खून बहाइये,आपस में एक दूसरे का हिन्दू मुस्लमान बनकर???
पर कभी सोचा है कि हमें हिन्दू मुस्लमान बनाता कोन हें??
हमारी नश्ले एक, हमारा खून एक, हमारी रस्मे एक और सब कुछ एक और भारत एक गंगा जमुनी तहजीब का गहवारा हैं।
क्योकि हम भारत के मूलनिवासी है।
लेकिन बहुत पूर्व एक विदेशी ताकत ,जो हमें अपना मानसिक गुलाम बनाकर ,अपने बंधनों में जकड़कर ,हम पर सदैव राज करना चाहते है, वो हमको ये करने पर मजबूर कर रहे हे और हम उनके बहकावे में आकर, वो सब कर रहे है, जो वो स्क्रिप्ट तैय्यार करते हैं और ये स्क्रिप्ट एक के बाद एक लिखी जा रही है,भोपाल कैदी एनकाउंटर भी उन्ही की लिखी एक स्क्रिप्ट हैं,
उस ताकत का नाम आज की तारीख में हैं आरएसएस ।
जिसे बहुत बारीकी से समझने की जरुरत है ।
और मैं तथाकथित हिन्दू भाईयो से कहना चाहता हूं।
आरएसएस हिंदूओं का नही बल्कि ब्राह्मणों का सशक्त संघठन है और देश की कुल आबादी में ब्राह्मणों की संख्या मात्र 3.5% है लेकिन हिन्दुत्ववाद का व्यापक मुखौटा पहनकर इन्होंने देश की पूरी व्यवस्था को कब्जे मे ले रखा है। ब्राह्मण जितनी नफरत मुसलमानों से करते हैं ,उससे कही ज्यादा बैर उन्हें एससी, एसटी, ओबीसी से है। कल को देश के मुसलमानों ने कानून अपने हाथ मे लेकर हिंसक रास्ता अपनाया तो मरेगा/मारेगा कौन? या तो तथाकथित दलित,एससी, एसटी,ओबीसी हिंदू मारेंगे/मरेंगे या फिर मुसलमान मारेंगे/मरेंगे। इसमें ब्राह्मणो का कोई नुकसान नही होगा। वह बहुत थोङे है और सुरक्षित हैं। और ब्राह्मणों को कोई फर्क नही पङता कि तथाकथित हिंदू मरे या मुसलमान। उन्हें बस ऐसी व्यवस्था चाहिए जो सौ प्रतिशत उनके हित में काम करे।  फिलहाल वैसी व्यवस्था के निर्माण और टिकाव का आधार हिंदू-मुसलमान विभाजन पर टिका हुआ है। ब्राह्मणो को मुसलमानों से कोई लाभ है न खतरा है क्योंकि मुसलमान ब्राह्मणी व्यवस्था को मानते ही नही है। ब्राह्मण चाहते है कि इस देश का तथाकथित हिंदू उनका मानसिक गुलाम बना रहे, बस इसीलिए उन्हें हिंदू-मुस्लिम दुश्मनी की बहुत ज्यादा जरूरत है।
मैं समझता हूँ कि आरएसएस और उसके  समरुप संगठनों को रोकने की जिम्मवारी भारत के तथाकथित हिंदूओ की हें।
मुस्लमान आज पिट रहा है ,मारा जा रहा है या सताया जा रहा हैं तो इससे तथाकथित हिन्दुओ को खुश होने की जरुरत नहीं है ,ये वही व्यवस्था है जिस मनुवादी व्यवस्था से, वो हज़ारो साल से हमारे पूर्वजों पर राज करते आये है, और लगता आगे भी करते रहेंगे चूंकि इस्लाम ने इस मनुवादी व्यवस्था को सबसे ज्यादा टक्कर दी है तो अब वो मुस्लमानो को ही निसाना बना रहे हें और मददे मुकाबिल हैं भारत के मूलनिवासी।
एक सख्स आये थे इस व्यवस्था से निजात दिलाने,
लेकिन दुःख की बात ये हे कि उसको आज हम अनुसरण नहीं करते, और उनका नाम था डॉ भीम राव आंबेडकर।
बाबा साहब प्रणाम आपको ।
हम आशावादी हैं उम्मीद का दामन कभी नहीं छोड़ते।

रमजान चौधरी।

2 comments:

  1. Very good thinking about our nation by Ramzan choudhry shab
    Well done

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  2. आपका आभार,हमारे साथ बने रहे।

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