मानवता के आदर्श
पैगम्बर मुहम्मद (सल्ल0) की शिक्षाओ की एक झलक(कुरआन और हदीसों से संकलित)
सम्पूर्ण सृष्टि का सृजनहार एक प्रभु हैं। वह अत्यन्त दयावान और कृपालु है। उसी की भक्ति करो और उसी की आज्ञा मानो।
र्इश्वर ने मानव पर अनगिनत उपकार किए हैं। धरती और आकाश की सारी शक्तियॉ मानव की सेवा मे लगा दी हैं। वही धरती और आकाश का मालिक हैं, वही तुम्हारा प्रभु हैं।
र्इश्वर (वास्तविक स्वामी) को छोड़कर अन्य की पूजा करना सबसे बड़ा जुल्म और अत्याचार है।
र्इश्वर की अवज्ञा करके तुम उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकते। आज्ञाकारी बनकर रहो, इसमें तुम्हारा अपना भला है।
र्इश्वर की याद से आत्मा को शांति मिलती हैं। उसकी पूजा से मन का मैल दूर होता है।
र्इश्वर की निशानियों र्इश्वर (दिन, रात, धरती, आकाश, पेड़-पौधे, जीव-जन्तु आदि की बनावट) पर विचार करो। इससे प्रभु पर विश्वास दृढ़ होगा और संकुचित विचारों से छुटकारा प्राप्त होगा।
मैं र्इश्वर (हजरत मुहम्मद सल्ल0) र्इश्वर की ओर से संसार का मार्गदर्शक नियुक्त किया गया हूॅ। मार्गदर्शन का कोर्इ बदला तुमसे नही चाहता। मेरी बातें सुनों और मेरी आज्ञा का पालन करो।
मै कोर्इ निराला और अजनबी पैगम्बर नही हूॅं। मुझसे पहले संसार मे मार्गदर्शन के लिए बहुत-से रसूल आ चुके हैं, अपने धर्म-ग्रन्थों में देख लो या किसी ज्ञानी व्यक्ति से मालूम कर लो।
मैं पहले के पैगम्बर की शिक्षा को पुन: स्थापित करने और कपटाचारियों के बन्धन से मानव को मुक्त कराने आया हू।
मैं इसलिए भेजा गया हू कि नैतिकता और उत्तम आचार को अंतिम शिखर तक पहुॅचा दू।
मैं लोगो की कमर पकड़-पकड़कर आग में गिरने से बचा रहा हू, किन्तु लोग हैं कि आग ही की ओर लपक रहे हैं।
मैं दुनियावालों के लिए रहमत बनाकर भेजा गया हूॅ। तुम लोगो के लिए आसानियॉ पैदा करो; मुसीबते न पैदा करो।
मॉ-बाप की सेवा करो। उनके सामने ऊॅची आवाज से न बोलो। उन्होने तुमपर बड़ा उपकार किया है, अत: तुम उनके आज्ञाकारी बनकर रहों।
मॉ-बाप यदि अन्याय का आदेश दे ंतो न मानों, बाकी बातों में उनकी आज्ञा का पालन करो।
सारे मानव एक प्रभु के पैदा किए हुए है, एक मॉ-बाप की संतान हैं। उनके बीच रंग-नस्ल जाति, भाषा, क्षेत्रीयता आदि का भेदभाव घोर अन्याय है।
सारे लोग आदम की सन्तान है, उनसे प्यार करो घृणा न करो। उन्हे आशावान बनाओं निराश मत करो।
मानव में श्रेष्ठ वह हैं जो दूसरों का हितैषी, पवित्र आचरणवाला और प्रभु का आज्ञाकारी हैं।
तुम धरतीवालों पर दया करो, आकाशवाला ( प्रभु ) तुम पर दया करेगा।
वह व्यक्ति सबसे अच्छा हैं जो अपने घरवालों और पड़ोसियों के लिए अच्छा हैं।
औरतों, गुलामों और यतीमों (अनाथों) पर विशेष रूप से दया करो।
जो अपने बेटे और बेटियो के बीच भेदभाव न करे और बेटियों का ठीक से पालन-पोषण करे, वह स्वर्ग में जाएगा।
जो बड़ो का आदर और छोटो से प्रेम न करे वह हम में से नहीं।
तुम सांसारिक जीवन मे मस्त होकर भूल मत जाओ, तुम सबको अपने किए हुए कर्मो का हिसाब अपने प्रभु को देना हैं। परलोक की सफलता ही वास्तविक सफलता हैं।
परलोक की यातना बड़ी कठोर हैं। वहॉ कुल-वंश, सगे-सम्बन्धी, धन-दौलत और किसी की सिफारिश कुछ काम आनेवाली नहीं।
र्इश्वर की आज्ञा का पालन और उत्तम आचरण ही (उसकी यातना से) बचने का एक मात्र साधन हैं।
अपने को और अपने घरवालों को नरक की अग्नि से बचाओं।
र्इश-मार्ग से खर्च करके स्वंय को नरक की अग्नि से बचाओं। तुम्हारा माल में तुम्हारे सम्बन्धियों, गरीबो, अनाथो का भी हक हैं। उनके हक अदा करो।
दूसरो का धन अवैध रूप से न खाओं। तिजारत या समझौते के द्वारा वैध रूप से धन प्राप्त करो।
चीजों मे मिलावट न करो, नाप-तौल मे कमी न करो। व्यापार में धोखा न दो। जो धोखा देता हैं हम में से नही।
बाजार मे भाव बढ़ाने के लिए (गल्ला आदि) चीजों को रोककर (जखीरा करके) मत रखों। ऐसा करनेवाला घोर यातना का अधिकारी है।
पैसे को गिन-गिनकर जमा न करो और न फिजूलखर्ची करो, मध्यम मार्ग को अपनाओं।
दूसरों के अपराध क्षमा कर दिया करो। दूसरों के ऐब का प्रचार न करो उसे छिपाओं, प्रभु तुम्हारे ऐबो पर परदा डालेगा।
झूठ, चुगलखोरी, मिथ्या आरोप से बचो। लोगो को बुरे नाम से न पुकारो।
अश्लीलता और निर्लज्जता के करीब भी न जाओ, चाहे वह खुली हो या छिपी।
दिखावे का काम न करो। दान छिपाकर दो। उपकार करके एहसान मत जताओ।
रास्ते से कष्टदायक चीजों (कॉटे, पत्थर आदि) को हटा दिया करो।
धरती पर नर्म चाल चलो, गर्व और घमण्ड न करो।
जब बोलो अच्छी बात बोलो अन्यथा चुप रहो।
अपने वचन और प्रतिज्ञा को पूरा करो।
सत्य और न्याय की गवाही दो, चाहे तुम्हारी अपनी या अपने परिवार-जनों की ही हानि क्यो न हो।
अन्याय के विरूद्ध संघर्ष करनेवाला र्इश्वर का प्रियपात्र होता है।
किसी बलवान को पछाड़ देना असल बहादुरी नही, बहादुरी यह है कि आदमी गुस्से पर काबू पाए।
मजबूर का पसीना सूखने से पहले उसकी मजदूरी अदा करो। किसी सेवक से उसकी शक्ति से अधिक काम न लो, उसके आराम का ख्याल रखो। जो खुद खाओं उसे भी खिलाओं और जो खुद पहनो उसे भी पहनाओं।
जानवरों पर दया करो, उनकी शक्ति से अधिक उनसे काम न लो।
किसी वस्तु का आवश्यकता से अधिक प्रयोग न करो। पानी का दुरूपयोग न करो, चाहे तुम नदी के किनारे ही क्यो न हो।
अपने शरीर, वस्त्र और घर को पाक-साफ रखों। जब सोकर उठो तो सबसे पहले अपने दोनो हाथों को धो लो। तुम्हे पता नही कि नींद में हाथ कहॉ-कहॉ गए हैं।
युद्ध मे औरतो, बच्चो, बीमारों और निहत्थो पर हाथ न उठाओं। फलवाले पेड़ो को न काटो।
युद्ध के बन्दियों के साथ अच्छा व्यवहार करो, यातनाएॅ न दो। जो कोर्इ बुरार्इ को देखे, तो भरसक उसे रोकने की कोशिश करे, यदि रोकने की क्षमता हो तो दिल से उसको बुरा समझो।
सरे कर्मो का आधार नीयत (इरादा) हैं। गलत इरादे के साथ किए गए अच्छे कर्मो का भी कोर्इ फल र्इश्वर के यहॉ नही मिलेगा।
प्रभु-मिलन की आशा के साथ जीवन व्यतीत करो। आशाओं के अनुरूप ही मानव के क्रिया-कलाप होते हैं।