Tuesday, 29 November 2016

Mohd. Tughlak was neither  so stupid and nor so cruel.

Mohd. Tughlak was neither  so stupid and nor so cruel.
Sharing Jasbir Chawla
मोहम्मद तुग़लक़ का पूरा नाम
'फक्र-उद-दीन मोहम्मद-बिन-तुग़लक़' को (1325-1351.AD)

🌑 मुद्रा का विमुद्रिकरण-तब नोट नहीं होते थे
🌑 उसने सिक्के ढलवाये लेकिन सिक्कों की धातु का मूल्य बहुत कम था और मुद्रा की फेसवेल्यु बहुत अधिक होनें से जालसाज़ी करनें वालों ने नक़ली सिक्कों की भरमार कर दी
🌑 चार साल के बाद उसनें वह मुद्रा बंद कर दी.
उसे उसकी सोच के कारण अपने समय से पहले पैदा हुआ माना जाता है
🌑 मोहम्मद तुग़लक़ तर्क,दर्शन खगोल शास्त्र,गणित,ज्योतिष,चिकित्सा विज्ञान में दक्ष था
🌑 वह अरबी,फ़ारसी,तुर्की और संस्कृत भाषाओं का ज्ञाता था
🌑 उसनें उत्तर और दक्षिण दोनों पर बेहतर शासन करनें के लिये राजधानी दिल्ली से दौलताबाद करनें का निर्णय किया
🌑 उसनें प्रजा को दौलताबाद शिफ़्टिंग के लिये अनुदान दिये
🌑 रास्ते मे हर तीन किलोमीटर पर आराम के लिये विश्रामस्थल बनाये
🌑 जहाँ भोजन पानी की व्यवस्था की
🌑 खानाकाह बनाये और सूफी संतों की वहाँ तैनाती की
🌑 दिल्ली दौलताबाद के बीच तीव्र गति की डाक सेवा शुरू की
🌑 उसका यह प्लान परिस्थितियों के कारण फ़ेल हो गया.

मेराज फ़ैज़ाबादी

दोस्तों
आज से 3 साल पहले का दिन,30नवम्बर 2013, उर्दू अदब के इतिहास में एक दुखद दिन रहा,हमने खोया उर्दू अदब कि खिदमत करने वाले एक नायब हीरे और एक ऐसी शख्सियत को जिसके शेर वाकई दहाड़ते हैं,जिसका लहजा लोगों के जेहन में उतर जाता हे, और जिसका कलाम शायरी की पाकीजगी को हमेशा अपने अंदर संझोये रहता हे...जनाब मेराज फ़ैज़ाबादी साहब को हमेशा के लिए खो दिया,वो आज हमारे बीच नहीं हैं मगर वो लोगों के जेहन में अल्फाज़ बनकर हमेशा जिन्दा रहेंगे उपरवाला वाला उनको जन्नत अता करे...तो दोस्तों भारी संवेदना के साथ उस अजीम शायर के कुछ कालजयी शेरो से आपको रूबरू करा रहा हूँ जो मुझे बहुत अजीज हैं....

अंधे ख्वाबों को उसूलों का तराजू दे दे
मेरे मालिक अब मुझे जज्बात पे काबू दे दे

में एक कतरा भी किसी गैर के हाथो से ना लूँ
एक कतरा भी समंदर हो अगर तू दे दे

सबके दुःख दर्द सिमट आयें मेरे सीने में
बाँट दे सबको हँसी ला मुझे आँसू दे दे

मैंने आँगन लगा रखे हैं खुशरंग गुलाब
देने वाले मेरे इन फूलों को खुश्बू दे दे

और

रूह का करब भी चेहरे पे सजा लाये हैं
हम खडखाल को आइना बना लाये हैं

अब कोई ठेस लगेगी तो बिखर जायेंगे
जिंदगी तुझको यहाँ तक तो निभा लायेंगे हैं

और क्या देगा ये रिश्तो का थका हार निज़ाम
घर से हम सिर्फ बुजुर्गो कि दुआ लाये हैं

चंद मासूम जिदे दो मुतलाशी आँखे
क्या बताएंगी कि बाज़ार से क्या लाये हैं

मेने जब धुल कि चादर से ये तन ढ़ाप लिया
लोग मेरे लिए फूलों कि कबा लाये हैं

और

मेरे लब्जो को मुहब्बत कि गवाही मिल जाये
मुझको भी मुमलकत-ए-शेर कि शाही मिल जाये

में भी खुशरो कि तरह शेर कहूं रखस करूँ
काश मुझको भी कोई मेहबूब-ए-इलाही मिल जाये

और

मुझको थकने नहीं देता ये जरूरत का पहाड़
मेरे बच्चे मुझे बूढ़ा नहीं होने देते

और

राजमहलों से खड्गता रास्ता हो जायेगा
हम फकीरो से जो उलझेगा फनाह हो जायेगा

तू खुद का नाम लेकर घर से निकला हे तो फिर
बहते दरिया में उतर जा रास्ता हो जायेगा

वो भी दिन थे यार कि हम दोनों कितने नजदीक थे
किसने सोचा था कि इतना फासला हो जायेगा

और

बेखुदी में रेत के कितने समंदर पी गया
प्यास भी क्या सयहे में घबराके पत्थर पी गया

मैकदे में किसने कितनी पी ये तो खुद जाने मगर
मैकदा तो मेरी बस्ती के कई घर पी गया

और

झील आँखों को नम होटो को कमल कहते हैं
हम तो झखमो कि नुमाइश को ग़ज़ल कहते हैं

और

वो शख्स सूरमा हे मगर बाप भी तो हे
रोटी खरीद लाया हे तलवार बेचकर

जिसके कलम ने मुद्दतों बोये हैं इंकलाब
अब पेट पालता हे वो अखबार बेचकर

कांपी जरा जमीन कि सब ख़ाक हो गया
हमने महल बनाये थे मीनार बेचकर

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Monday, 28 November 2016

मुस्लिम होने की वजह से पुलिस ने बुरी तरह पीटा

यह बांदा जिले की घटना है इनका जुर्म बस इतना था कि धर्म से मुसलमान रात को 21-11-16 को 10:00 बजे यह गांव में निमंत्रण से लौट रहे थे।पुलिसकर्मियों ने सभी के जेब में पड़े रुपए मोबाइल भी ले लिया रात को खूब पीटाऔर शरीर की चमड़ी उधेड़ दी ।थानेदार और पुलिस जबरदस्ती कबूल कराना चाहती थी कि युवकों ने ट्रक चालकों और क्लीनर से लूट की घटना को अंजाम दिया है। उत्तर प्रदेश के समाजवादी सरकार की सांप्रदायिक पुलिस ने बर्बरता पूर्वक मारकर  आख़िरकार बिरयानी निकाल ही दी।इन युवकों का नाम है शासाव,करीम,सलमान,शाेकिया,ऱासिक ,यह सभी खां  परिवार से बिलॉन्ग करते हैं
Fir की कॉपी भी देखिये
https://cctnsup.gov.in/cctnsfir/ShowFIRDetail.aspx?num=31628023160632         नकल तहरीर हिन्दी वादी श्रीमान् उपपुलिस महानिदेशक चित्रकूट धाम मण्डल बांदा महोदय निवेदन है कि प्रार्थी गण मौजा पिपरोदर थाना पैलानी जिला बांदा के निवासी है प्रार्थी गण दिनांक 21.11.16 को ग्राम सिकुहला थाना जसपुरा जिला बांदा में निमंत्रण में गये थे प्रार्थी गण निमंत्रण करके रात करीब 1 बजे रात वापस मोटर साइकिलों से अपने गावं पिपरोदर आ रहे थे कि समय करीब 1 बजे जैसे ही जसपुरा थाना के पास पहुंचे तो पुलिस वालों ने मोटर साइकिल रूकवा कर थाने ले गये और कहा कि तुम लुटेरें हो और प्रार्थी गण को मारना शुरू कर दिया प्रार्थी गण को बारी बारी से लाठी बेल्ट व राइफल के कुन्दों से मारना शुरू कर दिया प्रार्थी गण को इतना मारा कि प्रार्थी गण बेहोश होने लगे प्रार्थी गण के शरीर में गम्भीर चोटें आयी है और शरीर का चमडा निकल गया है प्रार्थी गण चिल्लाते रहे कि हम लुटेरे नही है शादी से आ रहे है और पता कर लीजिए लेकिन पुलिस वालों ने एक भी नही सुनी उक्त पुलिस वालों ने प्रार्थी गण को बहुत बुरी तरह मारा पीटा है पुलिस वाले जो मार रहे थे उनके नाम एस0ओ0 पंकज तिवारी, कां0 सरवन कुमार, कां0 नरायन यादव, कां0 अरविन्द राही, कां0 अमित कुमार, कां0 शैलेन्द्र व एस0आई0 रमाशंकर सभी ने मारा और प्रार्थी गण शासव s/o शमीम खां की जेब से 1950 रूपये करीम खां से 450 रूपये शोकिया खां से 500 रूपये व सेमसंग मोबाइल व सलमान खां से 1100 रूपये व मोबाइल राशिद खां से 800 रूपये जो जेब में पडे थे निकाल लिये तथा प्रार्थी गण का दुसरे दिन 151,107,116 में चालान कर दिया है प्रार्थी गण के शरीर में गम्भीर चोटें है प्रार्थी की चोटों का मुआयना भी नही कराया गया है अतः श्रीमान् जी से प्रार्थना है कि उक्त पुलिस वालों के विरूद्ध मुकदमा पंजीकृत करके कार्यवाही की जाये और प्रार्थी गण की चोटों का मुआयना कराया जाये sd करीम खाँ पेज (2) (2) प्रार्थी गण 1. शासाब खां s/o शमीम खां 2. करीम खां s/o मशारिक खां 3. शोफियान खां s/o सरताज खां 4. सलमान खां s/o अनीस खां 5. राशीद खां s/o शफीक खां निवासी गण ग्राम पिपरोदर थाना पैलानी जिला बांदा दिनांक 25.11.16 sd अपठनीय sd करीम खां sd सलमान खां sd सोफियान SHO को0 नगर कृ0 अभियोग पंजीकृत कर विधिक कार्यवाही करें विवेचना को0 नगर से ही होगी sd अपठनीय 25.11.16 S.P. नोट - आन डियूटी का0मु0 052262047 अनुराधा कुमार यादव के द्वारा कायमी व चिक सं0 570/16 एवं मु0अ0सं0 632/16 अन्तर्गत धारा 395,397,342 भा0द0वि0 हिन्दी लिखित वादी की नकल कम्प्यूटरीकृत शब्द व शब्द अंकित की गयी

Sunday, 27 November 2016

इजराइल में आग,आतंकवादी देश

FBP/16-452

इज़राइल में आग :-

इसराइल जब फिलिस्तीन के मासूम बच्चो का कत्ल कर रहा था तब इसराइल की मुर्दादिल आवाम ऊँचे टिब्बो पे बैठकर दूरबीन द्वारा खूंरेजी का लुत्फ़ उठा रही थी। वे हर धमाकों पे तालिया पीटते थे.. फिलिस्तीन के एक बड़े  अस्पताल में घायलों की भरमार लग चुकी थी.. अस्पताल के टॉयलेट, लॉबी और कैंटीन तक घायलों से भर चुके थे। ऐसे में इसराइल ने फिलिस्तीन के एकमात्र पावर हाउस स्टेशन को उड़ा दिया। पूरा देश अंधेरे में डूब गया..अस्पताल में बिजली की सुविधा सिर्फ जनरेटर के भरोसे रह गयी। 24 घण्टे बाद जनरेटर हांफने लगा और मरीज बिना ऑक्सिजन और बिजली के तड़प तड़प के मर गए.... इसराइल की हैवानियत का सबसे ज्यादा शिकार  बच्चे हुए है ये सारी दुनिया जानती है। जब फिलिस्तीन पे हमले हो रहे थे तब सारी दुनिया तमाशबीन थी, धर्म के और मानवता के ठेकेदार चुप थे।

उस वक़्त सिर्फ एक तुर्की ने इसराइल को धमकाया था।आज की तारीख में इसराइल इंसानियत का सबसे बड़ा दुश्मन है। इसराइल और अमेरिका तबाही मचाने के लिए हथियारों की खेती करते है, इस जहरीली खेती का शिकार आज नही तो कल हमारी आने वाली नस्ले हो जाएंगी।

कल जब हैफा शहर में आग लगी तब तुर्की ने मदद को हाथ आगे बढ़ाया, फिलिस्तीन ने इंसानियत का फ़र्ज़ अदा करते हुए इस मुश्किल घड़ी में अपने बच्चो के कातिल का साथ दिया और हम सबकुछ भूल भाल के संवेदनाए जताई बिना नही रह सके।।।  क्यों संवेदना जताई?? क्योकि हम जिन्दा है, हमारी रूहे मरी हुई नही है इसराइल की अवाम की तरह..  अगर हम खुश होने लग गए तो क्या फर्क रह गया उन टिब्बो पे बैठे हैवानो में और हम में??

रसुलल्लाह सल्ल. पे एक बुढ़िया अपनी नफरत जाहिर करने के लिए कचरा फेंकती थी, एक मर्तबा ऐसा हुआ की कचरा सिर पे गिरना बन्द हो गया। पैगम्बर सल्ल. को खबर मिली की बुढ़िया बीमार है, इतना सुनते ही आप पहली फुर्सत में उसकी अयादत को पहुँचे.. बुढ़िया दिल हार गई पैग़म्बरे इस्लाम के अख़लाक़ पे.. आज कोई हमारे मौलवी पे कचरा फेंक दे हम जान लेने पे उतर आए उसकी..। 

हमारा जब्त और हिम्मत पूरी दुनिया में मिसाल बनेगा एक दिन.. आज ये फिलिस्तीन के आंदोलनकारियो को आतंकी कहते हे, कल इतिहास फिलिस्तीन के जांबाज़ों की खूबियों की मिसाल देगा। ये खून व्यर्थ नही जाएगा। जो निहत्थे फिलिस्तीनी सीना तान कर हथियारबंद फौजियों के सामने खड़े हो जाते है ये जान निशारी भूले नही भुलाई जाएगी। 

और हाँ... नास्तिको.. ख़ुशी जाहिर करने वाले कठमुल्लों का स्क्रीनशॉट लेकर घूम रहे हो कभी इसराइल की बर्बरता पे भी अपना मुँह फाड़कर दिखाओ...

Abbas Pathan भाई की लिखी एक बेहतरीन पोस्ट
(मोहम्मद जाहिद की फेसबुक वाल से)

Friday, 25 November 2016

मानवता के आदर्श पैग़म्बर मुहम्मद स० की शिक्षाएं

मानवता के आदर्श
पैगम्बर मुहम्मद (सल्ल0) की शिक्षाओ की एक झलक(कुरआन और हदीसों से संकलित)
सम्पूर्ण सृष्टि का सृजनहार एक प्रभु हैं। वह अत्यन्त दयावान और कृपालु है। उसी की भक्ति करो और उसी की आज्ञा मानो।

र्इश्वर ने मानव पर अनगिनत उपकार किए हैं। धरती और आकाश की सारी शक्तियॉ मानव की सेवा मे लगा दी हैं। वही धरती और आकाश का मालिक हैं, वही तुम्हारा प्रभु हैं।

र्इश्वर  (वास्तविक स्वामी) को छोड़कर अन्य की पूजा करना सबसे बड़ा जुल्म और अत्याचार है।

र्इश्वर की अवज्ञा करके तुम उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकते। आज्ञाकारी बनकर रहो, इसमें तुम्हारा अपना भला है।

र्इश्वर की याद से आत्मा को शांति मिलती हैं। उसकी पूजा से मन का मैल दूर होता है।

र्इश्वर की निशानियों र्इश्वर (दिन, रात, धरती, आकाश, पेड़-पौधे, जीव-जन्तु आदि की बनावट) पर विचार करो। इससे प्रभु पर विश्वास दृढ़ होगा और संकुचित विचारों से छुटकारा प्राप्त होगा।

मैं र्इश्वर (हजरत मुहम्मद सल्ल0) र्इश्वर की ओर से संसार का मार्गदर्शक नियुक्त किया गया हूॅ। मार्गदर्शन का कोर्इ बदला तुमसे नही चाहता। मेरी बातें सुनों और मेरी आज्ञा का पालन करो।

मै कोर्इ निराला और अजनबी पैगम्बर नही हूॅं। मुझसे पहले संसार मे मार्गदर्शन के लिए बहुत-से रसूल आ चुके हैं, अपने धर्म-ग्रन्थों में देख लो या किसी ज्ञानी व्यक्ति से मालूम कर लो।

मैं पहले के पैगम्बर की शिक्षा को पुन: स्थापित करने और कपटाचारियों के बन्धन से मानव को मुक्त कराने आया हू।

मैं इसलिए भेजा गया हू कि नैतिकता और उत्तम आचार को अंतिम शिखर तक पहुॅचा दू।

मैं लोगो की कमर पकड़-पकड़कर आग में गिरने से बचा रहा हू, किन्तु लोग हैं कि आग ही की ओर लपक रहे हैं।

मैं दुनियावालों के लिए रहमत बनाकर भेजा गया हूॅ। तुम लोगो के लिए आसानियॉ पैदा करो; मुसीबते न पैदा करो।

मॉ-बाप की सेवा करो। उनके सामने ऊॅची आवाज से न बोलो। उन्होने तुमपर बड़ा उपकार किया है, अत: तुम उनके आज्ञाकारी बनकर रहों।

मॉ-बाप यदि अन्याय का आदेश दे ंतो न मानों, बाकी बातों में उनकी आज्ञा का पालन करो।

सारे मानव एक प्रभु के पैदा किए हुए है, एक मॉ-बाप की संतान हैं। उनके बीच रंग-नस्ल जाति, भाषा, क्षेत्रीयता आदि का भेदभाव घोर अन्याय है।

सारे लोग आदम की सन्तान है, उनसे प्यार करो घृणा न करो। उन्हे आशावान बनाओं निराश मत करो।

मानव में श्रेष्ठ वह हैं जो दूसरों का हितैषी, पवित्र आचरणवाला और प्रभु का आज्ञाकारी हैं।

तुम धरतीवालों पर दया करो, आकाशवाला ( प्रभु ) तुम पर दया करेगा।

वह व्यक्ति सबसे अच्छा हैं जो अपने घरवालों और पड़ोसियों के लिए अच्छा हैं।

औरतों, गुलामों और यतीमों (अनाथों) पर विशेष रूप से दया करो।

जो अपने बेटे और बेटियो के बीच भेदभाव न करे और बेटियों का ठीक से पालन-पोषण करे, वह स्वर्ग में जाएगा।

जो बड़ो का आदर और छोटो से प्रेम न करे वह हम में से नहीं।

तुम सांसारिक जीवन मे मस्त होकर भूल मत जाओ, तुम सबको अपने किए हुए कर्मो का हिसाब अपने प्रभु को देना हैं। परलोक की सफलता ही वास्तविक सफलता हैं।

परलोक की यातना बड़ी कठोर हैं। वहॉ कुल-वंश, सगे-सम्बन्धी, धन-दौलत और किसी की सिफारिश कुछ काम आनेवाली नहीं।

र्इश्वर की आज्ञा का पालन और उत्तम आचरण ही  (उसकी यातना से) बचने का एक मात्र साधन हैं।

अपने को और अपने घरवालों को नरक की अग्नि से बचाओं।

र्इश-मार्ग से खर्च करके स्वंय को नरक की अग्नि से बचाओं। तुम्हारा माल में तुम्हारे सम्बन्धियों, गरीबो, अनाथो का भी हक हैं। उनके हक अदा करो।

दूसरो का धन अवैध रूप से न खाओं। तिजारत या समझौते के द्वारा वैध रूप से धन प्राप्त करो।

चीजों मे मिलावट न करो, नाप-तौल मे कमी न करो। व्यापार में धोखा न दो। जो धोखा देता हैं हम में से नही।

बाजार मे भाव बढ़ाने के लिए (गल्ला आदि) चीजों को रोककर (जखीरा करके) मत रखों। ऐसा करनेवाला घोर यातना का अधिकारी है।

पैसे को गिन-गिनकर जमा न करो और न फिजूलखर्ची करो, मध्यम मार्ग को अपनाओं।

दूसरों के अपराध क्षमा कर दिया करो। दूसरों के ऐब का प्रचार न करो उसे छिपाओं, प्रभु तुम्हारे ऐबो पर परदा डालेगा।

झूठ, चुगलखोरी, मिथ्या आरोप से बचो। लोगो को बुरे नाम से न पुकारो।

अश्लीलता और निर्लज्जता के करीब भी न जाओ, चाहे वह खुली हो या छिपी।

दिखावे का काम न करो। दान छिपाकर दो। उपकार करके एहसान मत जताओ।

रास्ते से कष्टदायक चीजों (कॉटे, पत्थर आदि) को हटा दिया करो।

धरती पर नर्म चाल चलो, गर्व और घमण्ड न करो।

जब बोलो अच्छी बात बोलो अन्यथा चुप रहो।

अपने वचन और प्रतिज्ञा को पूरा करो।

सत्य और न्याय की गवाही दो, चाहे तुम्हारी अपनी या अपने परिवार-जनों की ही हानि क्यो न हो।

अन्याय के विरूद्ध संघर्ष करनेवाला र्इश्वर का प्रियपात्र होता है।

किसी बलवान को पछाड़ देना असल बहादुरी नही, बहादुरी यह है कि आदमी गुस्से पर काबू पाए।

मजबूर का पसीना सूखने से पहले उसकी मजदूरी अदा करो। किसी सेवक से उसकी शक्ति से अधिक काम न लो, उसके आराम का ख्याल रखो। जो खुद खाओं उसे भी खिलाओं और जो खुद पहनो उसे भी पहनाओं।

जानवरों पर दया करो, उनकी शक्ति से अधिक उनसे काम न लो।

किसी वस्तु का आवश्यकता से अधिक प्रयोग न करो। पानी का दुरूपयोग न करो, चाहे तुम नदी के किनारे ही क्यो न हो।

अपने शरीर, वस्त्र और घर को पाक-साफ रखों। जब सोकर उठो तो सबसे पहले अपने दोनो हाथों को धो लो। तुम्हे पता नही कि नींद में हाथ कहॉ-कहॉ गए हैं।

युद्ध मे औरतो, बच्चो, बीमारों और निहत्थो पर हाथ न उठाओं। फलवाले पेड़ो को न काटो।

युद्ध के बन्दियों के साथ अच्छा व्यवहार करो, यातनाएॅ न दो। जो कोर्इ बुरार्इ को देखे, तो भरसक उसे रोकने की कोशिश करे, यदि रोकने की क्षमता  हो तो दिल से उसको बुरा समझो।

सरे कर्मो का आधार नीयत (इरादा) हैं। गलत इरादे के साथ किए गए अच्छे कर्मो का भी कोर्इ फल र्इश्वर के यहॉ नही मिलेगा।
प्रभु-मिलन की आशा के साथ जीवन व्यतीत करो। आशाओं के अनुरूप ही मानव के क्रिया-कलाप होते हैं।

Tuesday, 22 November 2016

शिक्षा का महत्व

वाणिज्य संकाय के १२ वी. पास उस लड़के के इस कथन ने मुझे अंदर से झकझोर दिया कि भैया, पढ़ाई-लिखाई करने से क्या मिलेगा ? पढ़ाई-लिखाई करने से तो नौकरी भी नहीं मिलती ! इसलिए चने बेच रहा हूँ। कुछ नहीं कह सकता था। इसलिए चुपचाप वहाँ से चने लेकर अपने कमरे में लौट आया। बेशक, वह लड़का गलत नहीं कह रहा था। उसके परिवार की आर्थिक स्थिति और उनकी आवश्यकता कैसी और क्या होगी ? ये हम जान भी नहीं सकते। पढ़ाई-लिखाई करके नौकरी मिल जाना, ये समाज की आवश्यकता और नौकरी पाने वाले के सामर्थ्य दोनों के सामंजस्य की बात है। इसलिए धन अर्जित करने के लिए वैकल्पिक मार्ग व्यवसाय या कृषि को चुनना अच्छी बात है। परन्तु पढ़ाई-लिखाई करने से क्या मिलेगा ? उस लड़के का ऐसा सोचना मुझे अच्छा नहीं लगा। अरे, वो लड़का पढ़ा-लिखा था। उसमें यह सोच कैसे आ सकती है ? क्या उसकी शिक्षा ने उस पर सकारात्मक प्रभाव नहीं डाले थे ? क्या वह चने बेचने के कार्य से परेशान था ? जो भी हो, पर उसका ऐसा सोचना गलत है। एक कहानी : शिक्षा सिर्फ धन अर्जित करने का साधन नहीं है। शिक्षा के द्वारा आप अपने संरक्षित धन को अपना बनाए रख सकते हैं ! आपका अपना कमाया हुआ धन, जब आपकी संतान बिना मतलब के कार्यों में खर्च करने लगती है या आपको अँधेरे में रखकर आपसे पैसे मांगती है। या नई-नई तकनीकों या क़ानूनी नियमों का ज्ञान न होने की वजह से आपको जो नुक्सान होता है। या फिर एक व्यापारी नई योजना के तहत आपको शब्दों के द्वारा भ्रमित करते हुए। १५ की चीज २० में आपको यह कहकर बेच देता है कि आपको इस वस्तु को खरीदने में फलां-फलां प्रतिशत का फायदा होगा। तो यकीन मानिये ये आपकी अशिक्षा का ही परिणाम होगा कि आप शर्मिंदगी की वजह से कुछ न कह सकने के बाबजूद लुट जाएंगे। आपका संरक्षित धन अशिक्षित होने के कारण दूसरों का हो जाएगा। जबकि धन अर्जित करने के लिए आपको शाररिक या दिमागी मेहनत की आवश्यकता होती है।

एक बड़े व्यापारी का बड़ा लड़का जब शहर पड़ने को गया। तो उसके दोस्तों की संगत ने उस लड़के को बिगाड़ दिया। जिस लड़के को महीने में पांच हज़ार रुपयों की आवश्यकता होती थी। आज वही लड़का पिताजी से कहकर दस हज़ार रूपये अपने बैंक अकाउंट में बुलवा रहा था। पिताजी आखिर पिताजी जो ठहरे। दस हज़ार कहने के बाद भी बारह हज़ार रूपये अकाउंट में भेज दिए जाते थे। लड़के ने पिताजी से ज्यादा रूपये मंगवाने का कारण बढ़ती हुई मंहगाई और नए-नए पढ़ाई के कोर्सों को बताया। महीने के बीच में जब कभी लड़के को अचानक से अधिक रुपयों की आवश्यकता होती। तब वह लड़का किसी भी कंप्यूटर या अन्य तकनीकी कोर्सों के नाम गिना देता था। लड़के के पिता जी कोर्स के नाम के अक्षरों की बढ़ती हुई गिनती गिनकर अपने बेटे को रूपये पहुंचा देते थे। लड़का अब इतना शातिर होने लगा था कि कोर्स के नाम याद नहीं होने की वजह से नए कोर्सों के नाम गढ़ने लगा था। "हुला-लला-लु" कुछ इसी तरह के कोर्स के नाम लड़का अपने पिता जी को अंधकार में रखने के लिए उपयोग में ला रहा था। अब पिताजी क्या जाने कोर्स हिंदी में पढ़ाया जाना है या किसी अन्य भाषा में पढ़ाया जाना है ? अन्य भाषाओं के कोर्स में ज्यादा रूपये देने होते होंगे ? जितना बड़ा कोर्स का नाम होगा उतने ही अधिक रूपये देने होंगे ? पिता जी की इसी गलत समझ ने उस लड़के को और बिगड़ जाने दिया। बेशक पिता जी यह नही चाहते थे। परन्तु ऐसा हो रहा था। दादा-परदादा की संचित पूंजी उनका नाती गलत संगत में होने के कारण उस पूंजी को खर्च कर रहा था। पिता जी अपनी समझ के अनुसार कोर्स के नाम के अक्षरों को गिनना नहीं भूलते थे। पहली की अपेक्षा कोर्स के नाम में एक अक्षर बढ़ जाने से उस कोर्स की कीमत दो हज़ार बढ़ जाया करती थी। कुछ कोर्स कभी समाप्त नहीं होते थे। उन कोर्सों की क़िस्त हर महीने अकाउंट में पहुँच जाती थी। क्योंकि पिता जी यह भी नहीं जानते थे कि कोई भी कोर्स लगभग कितने दिनों में समाप्त होता है ? और अंत में एक दिन पिताजी को यह पता चलता है कि उनके पुत्र ने विश्वविद्यालय में स्नातक की पढ़ाई के लिए प्रवेश ही नहीं लिया है। यह केवल एक कहानी ही नहीं हकीकत भी है। शिक्षा कई मायनों में अहमियत रखती है। शिक्षा सिर्फ धन अर्जित करने के लिए नहीं बल्कि उस संचित धन को अपना बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है। जिसे आपने मेहनत करके कमाया हुआ है। शिक्षा के माध्यम से आप अपनी बात लोगों के सामने उचित अर्थ के साथ रख सकते हैं। शिक्षा महान पुरुषों का एक मात्र अचूक अस्त्र है। जिसका उपयोग वे समाज की भलाई के लिए करते हैं। एक शिक्षित व्यक्ति शिक्षा के महत्व को हमेशा पहचानता है। वह शिक्षा को साधन के रूप में एक स्थान में पड़ा नहीं रहने देता। बल्कि हर दिन हर समय वह शिक्षा का उपयोग स्वयं और समाज के लिए करता है। क्योंकि वह जानता है कि यदि वह अपने आपको शिक्षित कहलवाना चाहता है। तो उसे लोगों को शिक्षित करना होगा।

पूरा लेख यहाँ से पढ़ें : http://www.basicuniverse.org/2015/02/Shiksha-ka-Mahatva.html?m=1
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