Tuesday, 25 October 2016

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नाम खुला ख़त

खुला खत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नाम

आप वजीर ऐ आज़म है,इस मुल्क के सबसे बड़े ओहदे पे बैठे हुए आदमी,आप राम की बात करते है,आप रामायण की बात करते है,लेकिन आप महान राजा राम चंद्र जी के न्याय की बात नही करते ,आप राम के राम राज्य की बात करते है,लेकिन राम राज्य के वास्तविक रूप की आप बात नही करतें।

राम अपनी प्रजा को दुखी नही देखता था,रघुवंशी राजा राम ने अपनी प्रजा के जीवन को सुखमय और सुरक्षित बनाने के लिए सदैव प्रयत्न किये।

लेकिन आप को
मिन्हाज़,नजीब,मोहसिन,अख़लाक़ की चीखें नही सुनाई देती।आपको दादरी,डिंगरहेड़ी,मंदसौर, नही दिखाई देता।

बेकसूरों की जाने रोज जा रही है,इस मुल्क का मुसलमान अपनी जिंदगी की जद्दोजहद हर रोज कर रहा है,हर रोज कभी गाय के नाम पे,कभी लव जिहाद,कभी कुछ कभी कुछ,हर रोज अल्पसंख्यको को जानवरो की तरह मारा जा रहा है और आप 10 लाख का सूट पहन कर,दुनिया में घूम कर अपनी महानता के झूठे गुणगान गा रहे है।

आपने एक बार कहा था आप राजधर्म का पालन कर रहे है,कौन सा राजधर्म,कैसा राजधर्म,कहाँ का राजधर्म,वो राजधर्म आपका अलग होगा रघुवंशी राजा राम का नही हो सकता,राजा राम सबरी के झूठे बैर खाते थे,आप तो हमे देखना भी पसन्द नही करते।राजा राम के न्याय के गुणगान आज तक संसार गा रहा है,किंतु आपके शाशन में अल्पसंख्यक,दलित,आदिवासी,सब कराह रहे है।

आप का दिल नही दुखता,राजा राम जब राजा थे तो प्रजा के सुख के लिए चिंतित रहते थे,आप सिर्फ कुर्सी के लिए चिंतित रहते है।

यदुवंशी राजा श्री कृष्णा सुदामा की मित्रता में नँगे पाँव दौड़ कर आते है,सुदामा को गले से लगा कर फुट फुट कर रो दिए,और बहुत मुहब्बत से महल में ले जा कर उसके पैरों के कांटो को निकाला,पैर धोये,हिन्दू मुस्लिम मुहब्बत भी इसी तरह है,लेकिन आप इसे जोड़ने में,इसकी हिफाज़त में नाकाम रहे।

आखिर किस तरह आपको देवता पुकारू,आपने ये तो कहा 80फीसदी गोरक्षक नकली है,लेकिन आप ने उनपे लगाम लगाने के साथ साथ अगर अल्पसंख्यको की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाये होते तो लोग गुजरात भूल कर आपको मसीहा स्वीकार कर लेते।

ऐसा नही आपको नही पता,आप जानते है,सब कुछ जानते है,लेकिन आपको आहो फुगाँ सुनाई नही देती क्योंकि आपने अभी तक अपनी आँखों से धर्म का नकली चश्मा नही हटाया है।

मोदी जी,
धर्म मनुष्य को मनुष्यता सिखाता है,उसे प्रेम की मूर्ति बनाता है,त्याग का योग देता है,न्याय का ह्रदय देता है,आस्था का सागर देता है,राज योग की समझ देता है किंतु आप अपने आप को धर्मी भी कहते है और मुझे इन सब का आपमें अभाव भी दीखता है।

जीवन और मृत्यु एक दरवाजे से दूसरे दरवाजे से निकलने की चेस्टा है,किंतु ये जो दोनों दरवाजो के बीच का रास्ता है ये परीक्षा है,अगर आपने प्रभु की बनायीं लीला का सदुपयोग नही किया और इस परीक्षा को केवल कुर्सी की दृष्टि से देखा तो यकिन मानिये कभी मुक्ति नही पा सकोगे।

गरीबो में प्रभु बस्ते है,उनकी सुन लो,पीड़ितों में प्रभु है उन्हें सुन लो,और इन्साफ दो,धर्म के काल्पनिक चश्मे को हटा कर,हर उस इंसान को जो पीड़ित है,वास्तविक राज धर्म ये है।
जब तक सबको रोटी,कपड़ा,मकान,न्याय,सुरक्षा,शिक्षा नही मिलती आपका राजधर्म,केवल भर्म होगा।

मिन्हाज़,को न्याय दे,राजन,न्याय दे
नजीब को न्याय दे राजन न्याय दे
डिंगरहेड़ी को न्याय दे राजन न्याय दे
सबको न्याय दे
इस पद की गरिमा को महान कर दो अशोक और अकबर की तरह।सारे गिले शिकवे भूल जाएंगे,हमे गैर समझने वालो को सन्देश दीजिये हम भी भारतीय है,धर्म देखकर देशद्रोही समझना अशफ़ाक़ उल्लाह खान,वीर अब्दुल हमीद,ब्रिगेडयर उस्मान सहित लाखो सहीदो का भी अपमान होगा।

मेरा अनुरोध स्वीकार करे,अन्यथा परमेश्वर के सामने आपको गुनाहगार बताऊंगा मैं।

नदीम खान मामलीका

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