Deen Mohammad Mamlika (समाज के लिए जिंदगी भर सँघर्ष करने वाले अद्भुत्त और सादगी के व्यक्तित्व से पूर्ण समाजसेवी)की कलम से
मेवात में आज का नौजवान काफी पढ़ा लिखा है ये आपके बड़ों का सपना था । वो अब साकार होने की तरफ अग्रशर है । फीमेल तालीम में आज भी पूरे हरयाणा से पीछे है । आज के अखबार के अनुसार मेवात का फीमेल तालीमी मयार 37.6% है , इसमें में मुस्लिम फीमेल तालीमी मयार सिर्फ 10 % है जो सिर्फ क ख ग जानती हैं ।
आपके जो बड़े हैं उन्होंने आपको पढ़ाया लिखाया और पढ़लिख कर जिस रास्ते पर हैं वो बड़ा ही दुखदाई है ।पढलिख कर माँ बाप के और अपने बड़ों के सपने को उनके सामने आप चकनाचूर कर रहें हैं । आपकी आँखे खुल कर देखने और कुछ समझने लायक जब हुई तो आप तो बहुत पैसेवाले घर में पैदा हुए । मगर हकीकत इसके विपरीत है । कभी बड़े बुजुर्गों और उनकी भी दास्ताँ सुनने का वक्त निकालो और उसे समझकर सोचने की कौशिश करा करो । मेवात में कुछ ही गिनती के परिवार थे जो आसूदा थे । बड़ी मेहनत से और उम्मीदों से आपको इस मकाम तक पहुंचाया है की आप लोग ही उनके आसूदा सपनों को साकार करेंगे । पर आप किस दशा और दिशा में जा रहे हैं उन्हें दुःख हो रहा है ।
आपसे मै उम्मीद करता हूँ की आप एक नए मेवात को जन्म दे , उसे नए अंदाज में परवरिश दें ।वो मेवात आपके बड़ों के सपने साकार करता दीखाई दे । वो मेवात विकसित और पढ़ालिखा मेवात हो । जिसमे कोई भी बच्चा खाली पेट और नंगे तन ना हो । वो मेवात जो हमारे पड़ौसी अहीर लैंड और जाठ लैंड जैसा तो कम से कम हो । उस मेवात में कहीं अशिछा के लिये जगह ना हो । उस मेवात में दिल्ली के नज़दीक रेहने और सायबर सिटी गुडगाँव की झलक साफ़ साफ दीखाई दे । मेरे हर नौजवान के हाथ में रोजगार हो ।बेरोजगारी कम से कम हो । जुआ ,सट्टा शराब , गांझा , अफीम , सेशन, चोरी , लूटमार , डाका , जैसी बुराइओं से दूर हो जिसके लिये इस्लाम साफ़ साफ़ मना भी करता है ।मेरा नौजवान दीनी तालीम के साथ साथ दुनियावी तालीम से महरूम ना रहे ।
ऐसा मेवात हो मेरा जिसमे चारों तरफ खुशहाली हो ।ये काम आप ही कर सकते हैं ।
अल्लामा इकबाल साहेब का कलाम :- जब मेरा पियारा देश अंग्रेजो से आज़ाद हुआ था तो उन्होंने एक तराना लिखा था उसके बोल हैं ये
$$हम लाए है तूफ़ान से कश्ती निकाल के ।
इस देश (मेवात )को रखना मेरे बच्चों सम्हाल के ।।$$
1947 के बाद में बहुत परेशानियों के बाद आप इस हॉल मे पहुंचे हैं , इस उम्मीद के साथ की हमारी नई पीढियां इसे आगे बढ़ाएंगी । क्या इस सपने को साकार करने के लिये आप तैयार हैं?
Saturday, 7 January 2017
मेरे बच्चो मेवात की कश्ती को डूबने न देना
मेरे बच्चो मेवात की कश्ती को डूबने न देना
Deen Mohammad Mamlika (समाज के लिए जिंदगी भर सँघर्ष करने वाले अद्भुत्त और सादगी के व्यक्तित्व से पूर्ण समाजसेवी)की कलम से
मेवात में आज का नौजवान काफी पढ़ा लिखा है ये आपके बड़ों का सपना था । वो अब साकार होने की तरफ अग्रशर है । फीमेल तालीम में आज भी पूरे हरयाणा से पीछे है । आज के अखबार के अनुसार मेवात का फीमेल तालीमी मयार 37.6% है , इसमें में मुस्लिम फीमेल तालीमी मयार सिर्फ 10 % है जो सिर्फ क ख ग जानती हैं ।
आपके जो बड़े हैं उन्होंने आपको पढ़ाया लिखाया और पढ़लिख कर जिस रास्ते पर हैं वो बड़ा ही दुखदाई है ।पढलिख कर माँ बाप के और अपने बड़ों के सपने को उनके सामने आप चकनाचूर कर रहें हैं । आपकी आँखे खुल कर देखने और कुछ समझने लायक जब हुई तो आप तो बहुत पैसेवाले घर में पैदा हुए । मगर हकीकत इसके विपरीत है । कभी बड़े बुजुर्गों और उनकी भी दास्ताँ सुनने का वक्त निकालो और उसे समझकर सोचने की कौशिश करा करो । मेवात में कुछ ही गिनती के परिवार थे जो आसूदा थे । बड़ी मेहनत से और उम्मीदों से आपको इस मकाम तक पहुंचाया है की आप लोग ही उनके आसूदा सपनों को साकार करेंगे । पर आप किस दशा और दिशा में जा रहे हैं उन्हें दुःख हो रहा है ।
आपसे मै उम्मीद करता हूँ की आप एक नए मेवात को जन्म दे , उसे नए अंदाज में परवरिश दें ।वो मेवात आपके बड़ों के सपने साकार करता दीखाई दे । वो मेवात विकसित और पढ़ालिखा मेवात हो । जिसमे कोई भी बच्चा खाली पेट और नंगे तन ना हो । वो मेवात जो हमारे पड़ौसी अहीर लैंड और जाठ लैंड जैसा तो कम से कम हो । उस मेवात में कहीं अशिछा के लिये जगह ना हो । उस मेवात में दिल्ली के नज़दीक रेहने और सायबर सिटी गुडगाँव की झलक साफ़ साफ दीखाई दे । मेरे हर नौजवान के हाथ में रोजगार हो ।बेरोजगारी कम से कम हो । जुआ ,सट्टा शराब , गांझा , अफीम , सेशन, चोरी , लूटमार , डाका , जैसी बुराइओं से दूर हो जिसके लिये इस्लाम साफ़ साफ़ मना भी करता है ।मेरा नौजवान दीनी तालीम के साथ साथ दुनियावी तालीम से महरूम ना रहे ।
ऐसा मेवात हो मेरा जिसमे चारों तरफ खुशहाली हो ।ये काम आप ही कर सकते हैं ।
अल्लामा इकबाल साहेब का कलाम :- जब मेरा पियारा देश अंग्रेजो से आज़ाद हुआ था तो उन्होंने एक तराना लिखा था उसके बोल हैं ये
$$हम लाए है तूफ़ान से कश्ती निकाल के ।
इस देश (मेवात )को रखना मेरे बच्चों सम्हाल के ।।$$
1947 के बाद में बहुत परेशानियों के बाद आप इस हॉल मे पहुंचे हैं , इस उम्मीद के साथ की हमारी नई पीढियां इसे आगे बढ़ाएंगी । क्या इस सपने को साकार करने के लिये आप तैयार हैं?